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[Latest*] Hindi Grammar Book PDF Download [हिन्दी व्याकरण]





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हिन्दी व्याकरण Book 

Hidni Grammar हिंदी एक ऐसा विषय है जो भारत की लगभग सभी एकदिवसीय व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न भारतीय राज्यों की परीक्षा में सम्मिलित किया गया है, जैसे- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, छत्तीशगढ़ आदि तमाम भारतीय राज्य हैं, आज हमने इन्हीं सभी कारणों को देखते हुए की हिन्दी कितनी महत्वपूर्ण टॉपिक है, इसलिए Hindi Vyakran PDF लेकर आये हैं. आपको बता दें कि यह बुक प्रसिद्ध परीक्षाओं जैसे- SSC CGL, SSC CHSL, SSC JE, SSC MTS, Police, Railway, Bank आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में आती हैं. यहाँ से आप नीचे दिये लिंक्स पर क्लिक करके हिन्दी की बुक डाउनलोड कर सकते हैं….

Hidni Grammar PDF में सम्मिलित किये गये महत्वपूर्ण टॉपिक

[su_spoiler title=”सम्मिलित विषय दिखाएं…” style=”simple”]वर्ण, स्वर, व्यंजन, संज्ञा, वचन, कारक, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, काल, वाच्य, वाक्य, उपसर्ग, प्रत्यय, संधि, समास, अलंकार,शब्द भेद, रचना के आधार पर, अर्थ के आधार पर, उत्तपत्ति के आधार पर, तत्सम एवं तद्भव, देशज शब्द, विदेशज शब्द, भाषा और व्याकरण, शब्द रूपान्तरण, पद परिचय, सन्धि, समास, परिभाषा एवं प्रकार, उपसर्ग परिभाषा एवं प्रकार, प्रत्यय, अर्थ-विचार, शुद्ध वर्तनी, शब्द शक्ति, वाक्य विचार, विराम चिन्ह, मुहावरे, अलंकार, पत्र लेखन, तार लेखन, निबन्ध रुपान्तर के आधार पर, शब्दो मे अर्थ का बोध कराने वाली शक्तियॉ, हिन्दी वर्णमाला, भाषा ,लिपि और व्याकरण, संज्ञा, सर्वनाम, वच, लिंग, क्रिया, विशेषण, कारक, काल, समास, अलंकार, पर्यायवाची, क्रियाविशेषण, विलोम शब्द, समुच्चयबोधक, हिंदी का उद्भव व विकास आदि महत्वपूर्ण टॉपिक सम्मिलित किये गये हैं, जो आपकी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण हैं।[/su_spoiler]



Competitive Hindi Grammar Book

सबसे पहले नीचे दिए गए लेख मे आप पढ सकते है, की हिन्दी व्याकरण होता क्या ? अर्थात हिन्दी व्याकरण की परिेभाषा से शुरुआत करते है, नीचे दी गई Hindi Vyakran से सम्बन्धित मह्तपूर्ण जानकारी जो आपके लिए जानना बहुत ही महत्वपूर्ण है…

व्याकरण की परिभाषा- व्याकरण वह विद्या है, जिसके द्वारा हमे किसी भाषा का शुद्ध बोलना, लिखना एवं समझना आता है। या दूसरे शब्दों में कहे तो …. व्याकरण वह शास्त्र है, जिसके द्वारा भाषा का शुद्ध मानक रूप निर्धारित किया जाता है।

व्याकरण के प्रकार:- व्याकरण निम्न प्रकार की होती है…

(1) वर्ण या अक्षर के आधार पर
(2) शब्द के आधार पर
(3)वाक्य के आधार पर

व्याकरण के अंग:- व्याकरण के तीन अंग हैं…

(1) ध्वनि-विचार (2) पद-विचार (3) वाक्य-विचार

संज्ञा और इसके भेद

संज्ञा- किसी का नाम ही उसकी संज्ञा है, इससे ही वह जाना जाता है या व्याकरण की भाषा में कहें तो…

किसी व्यक्ति, वस्तु स्थान या भाव के नाम को भी संज्ञा कहते है।

संज्ञा के उदाहरण:- श्याम, कुर्सी, कलम, गंगा, इत्यादि।

संज्ञा के 5 प्रकार के भेद होते हैं. जो निम्नलिखित प्रकार से हैं….

    1. व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)- व्यक्तियों के नाम, समुद्रो के नाम, दिशाओं के नाम, देशों के नाम, नदियों के नाम इत्यादि।
    2. जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)- सम्बन्धियों, व्यवसायों पदों और कार्यो के नाम, पशु-पक्षियों के नाम इत्यादि।
    3. भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)- कठोरता,बुढापा, लड़कपन, ममता इत्यादि।
    4. द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun)- दूध, दही, पनीर, तेल, सोना, चाँदी, इत्यादि।
    5. समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun)- कक्षा, सेना, भीड़, मण्ड़ली, गिरोह, सभा इत्यादि।



[su_box title=”Arihant Hindi व्याकरण Book PDF Live….” style=”soft” box_color=”#e20b0d” title_color=”#ffffff” radius=”1″]इस Book को Arihant Publication द्वारा Publish किया गया है. जिसमे Hindi विषय की Complete जानकारी दी गई… इस बुक से सम्बन्धित टॉपिक की सूची नीचे दी गई है:-हिन्दी भाषा का इतिहास एवं मुख्य तथ्य वर्ण,उच्चारण एवं वर्तनी शब्द भेद पर्यायवाची शब्द विलोमार्थक शब्द अनेकार्थक शब्द समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द वाक्यांशों के लिये एक शब्द हिन्दी व्याकरण शब्द रचना वाक्य वाक्यगत अशुद्धियाँ और उनका शोधन रिक्त स्थानों की पूर्ति क्रम व्यवस्थापन विराम चिन्ह मुहावरे और कहावतें रस,छंद और अलंकार पत्र लेखन सरकारी कार्यालयों के पत्र और आलेखन निबंध लेखन मानक वाक्यांश,अभिव्यक्तियाँ एवं पारिभाषिक शब्दावली अपठित लेखांश हिन्दी साहित्य के स्मरणीय तथ्य।

Book Name: हिंदी व्याकरण
Quality: Excellent/HD
Format: PDF Size: 52 MB
Author: Arihant Publication
Pages: 153 Page Language: Hindi

हिन्दी डाउनलोड करने हेतु यहाँ पर क्लिक करें…

यहां हमने इन नोट्स के बारे में कुछ इंपोर्टेंट डिटेल ऐड कर दी है जो आप सभी के लिए बहुत ही उपयोगी होगी जैसे कि इस बुक में कितने पेजेस हैं और आप इस बुक को कितने MB में डाउनलोड कर सकते हैं. बुक को डाउनलोड करने की डायरेक्ट लिंक उपलब्ध करा दिया गया है, जिससे आप ऊपर दिये गये लिंक पर क्लिक करके आप आसानी से इस बुक को अपने फोन में सेव कर सकते हैं यह बुक प्रत्येक परीक्षाओं के लिए उपयोगी है.[/su_box]




छन्द कि परिभाषा:-

जातीय संगीत और भाषावृत्ति के आधार पर निर्मत लयादर्श की आवृत्ति को छन्द कहते है. छन्द में निश्चित मात्रा या वर्ण की गणना होती है. छन्द के आदि चार्य पिंगल है। इसी से छन्द शास्त्र को पिंगलशास्त्र भी कहते है..

चरण

प्रत्येक छन्द चरणों में विभाजित होता है. इनको पद या पाद कहते है. छन्द में प्रायः चार चरण होते है. जो सामान्यतः चार पंक्तियों में लिखे जाते है…

वर्ण और मात्रा

मात्रा से अभिप्राय उच्चारण के समय की मात्रा से है. गुरू में लघु की अपेक्षा दूना समय लगता है इसलिए मात्रओं की जहाँ गणना होती है. वहाँ लघु की एक मात्रा होती है. और गुरू की दो मात्राएँ होती है. लघु का संकेत खड़ी रेखा ‘।’ और गुरू का संकेत वक्र रेखा ‘s’ होता है. लघु के लिए ‘ल’ तथा गुरू के लिए ‘ग’ के संकेतो का भी प्रयोग होता है…

छन्द के प्रकार

मात्रा और वर्ण के आधार पर छन्द 2 प्रकार के होते हैं:-

  • मात्रिक छन्द
  • वर्णिक छन्द

मात्रिक छन्द

मात्रिक छन्दों में केवल मात्राओं की व्यवस्था होती है, वर्णो के लघु और गुरू के क्रम का विशेष ध्यान नहीं रखा जाता है. इन छन्दो के प्रत्येक चरण में मात्राओं की संख्या नियत रहती है, मात्रिक छन्द तीन प्रकार के होते हैं- सम,अर्धसम और विषम.

चौपाई छंद

यह एक मात्रिक छंद होता है। इसमें चार चरण होते हैं, इसके हर चरण में 16 मात्राएँ होती हैं, चरण के अंत में गुरु या लघु नहीं होता है लेकिन दो गुरु और दो लघु हो सकते हैं.
उदाहुण-
“इहि विधि राम सबहिं समुझावा
गुरु पद पदुम हरषि सिर नावा।”

दोहा

यह अर्धसममात्रिक छन्द है. यह सोरठा का विपरीत होता है. इसमें चार चरण होते है इसके विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 13, 13 मात्राएं होती है. सम चरणों (दूसरे ओर चौथे) में 11, 11 मात्राएँ होती हैं..
उदाहरण-
“श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि ।
बरनउं रघुवर विमल जस, जो दायक फल चारि ।।”

सोरठा

यह मात्रिक अर्द्धसम छंद है. इसके विषम चरणों में 11मात्राएँ एवं सम चरणों में 13 मात्राएँ होती हैं. तुक प्रथम एवं तृतीय चरण में होती है. इस प्रकार यह दोहे का उल्टा छंद है…
उदाहरण-
“कुंद इंदु सम देह , उमा रमन करुनायतन।
जाहि दीन पर नेह , करहु कृपा मर्दन मयन॥”

रोला

मात्रिक सम छंद है , जिसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं. तथा 11 और 13 पर यति होती है. प्रत्येक चरण के अंत में दो गुरु या दो लघु वर्ण होते हैं. दो -दो चरणों में तुक आवश्यक है.
उदाहरण-
“नित नव लीला ललित ठानि गोलोक अजिर में।
रमत राधिका संग रास रस रंग रुचिर में॥”



कुंडलियाँ छंद

कुंडलियाँ विषम मात्रिक छंद होता है. इसमें 6 चरण होते हैं. शुरू के 2 चरण दोहा और बाद के 4 चरण छंद के होते हैं. इस तरह हर चरण में 24 मात्राएँ होती हैं..
उदाहरण-
“सांई अपने भ्रात को ,कबहुं न दीजै त्रास।
पलक दूरि नहिं कीजिए , सदा राखिए पास॥
सदा राखिए पास , त्रास कबहुं नहिं दीजै ।
त्रास दियौ लंकेश ताहि की गति सुनि लीजै॥
कह गिरिधर कविराय राम सौं मिलिगौ जाई।
पाय विभीषण राज लंकपति बाज्यौ सांई॥”

हरिगीतिका

यह मात्रिक सम छंद हैं. प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं. यति 16 और 12 पर होती है तथा अंत में लघु और गुरु का प्रयोग होता है..
उदाहरण-
“कहते हुए यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए॥”

बरवै

यह मात्रिक अर्द्धसम छंद है. जिसके विषम चरणों में 12 और सम चरणों में 7 मात्राएँ होती हैं. यति प्रत्येक चरण के अन्त में होती है. सम चरणों के अन्त में जगण या तगण होने से बरवै की मिठास बढ़ जाती है.
उदाहरण-
“वाम अंग शिव शोभित , शिवा उदार।
सरद सुवारिद में जनु , तड़ित बिहार॥”

सवैया छन्द

इसके हर चरण में 22 से 26 वर्ण होते हैं. इसमें एक से अधिक छंद होते हैं. ये अनेक प्रकार के होते हैं और इनके नाम भी अलग -अलग प्रकार के होते हैं. सवैया में एक ही वर्णिक गण को बार-बार आना चाहिए..
उदाहरण-
“लोरी सरासन संकट कौ,
सुभ सीय स्वयंवर मोहि बरौ।
नेक ताते बढयो अभिमानंमहा,
मन फेरियो नेक न स्न्ककरी।
सो अपराध परयो हमसों,
अब क्यों सुधरें तुम हु धौ कहौ।
बाहुन देहि कुठारहि केशव,
आपने धाम कौ पंथ गहौ।।”


विशेषण

जो शब्द किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम कि विशेषता बतातें हैं उन्हे विशेषण कहतें है.

विशेषण के प्रकार:-

संख्या वाचक विशेषण

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम कि संख्या बताते है. उन्हें संख्यावाची विशेषण कहते है. यह तीन प्रकार का होता है.

  • निश्चित संख्या वाचक
  • अनिश्चित संख्या वाचक
  • परिणाम वाचक

निश्चित संख्यावाचक विशेषण

जिससे संज्ञा या सर्वनाम की संख्या के बारे में निश्चित रूप से बताया जाता है. कि इसकी इतनी संख्या है तो वहाँ पर निश्चित संख्यावाचक विशेषण होता है. इसके 5 भेद होते है..

  • गणना वाचक विशेषण- एक, दो, तीन, चार, सौ, पाव, आधा, पौन, सवा, ढाई, तिहाई इत्यादि।
  • क्रम वाचक विशेषण- पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पाँचवा, सौवाँ इत्यादि।
  • समुदाय वाचक विशेषण- दोनों, तीनों, सैकड़ों, हजारों इत्यादि।
  • आवृत्ति वाचक विशेषण- इकहरा, दोहरा, तिहरा, दोगुना, तिगुना, सौगुना, हजारगुना, लाखगुना इत्यादि।
  • बोधकवाचक विशेषण- जिन शब्दो के द्वारा प्रत्येक का बोध होता है. उसे प्रत्येक बोधक विशेषण कहते है.
  • पंक्ति से मिलना है- सवा-सवा किलो सेब लेते आना,  इत्यादि।




[su_box title=”Disclaimer” style=”soft” box_color=”#a21323″ title_color=”#ffffff” radius=”1″]SarkariGanga.com के पास इस पुस्तक का स्वामित्व नहीं है, न तो बनाया गया है और न ही स्कैन किया गया है। हम सिर्फ इंटरनेट पर उपलब्ध लिंक प्रदान कर रहे हैं। अगर किसी भी तरह से यह कानून का उल्लंघन करता है या कोई समस्या है तो कृपया हमसे संपर्क करें… www.sarkariganga.com@gmail.com[/su_box]

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Comments

  1. Anonymous says:

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  2. Anonymous says:

    Hiw can i download this pdf

  3. “हिन्दी पीडीएफ डाउनलोड करने हेतु यहाँ पर क्लिक करें” जहाँ पर क्लिक करके आप डाउनलोड कर सकते हैं.
    सरकारी गंगा में विजिट करने के लिए धन्यवाद!

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